Shri Prakash shukla :- 25 साल का लड़का जिसने मुख्यमंत्री की सुपारी 6 करोड़ में ली

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Shri Prakash shukla 25 साल का लड़का जिसने मुख्यमंत्री की सुपारी 6 करोड़ में ली
Shri Prakash shukla 25 साल का लड़का जिसने मुख्यमंत्री की सुपारी 6 करोड़ में ली

Shri Prakash shukla मुख्यमंत्री की सुपारी लेने वाली एक मात्र गैंगस्टर की जन्म से लेकर एनकाउंटर तक की पूरी कहानी.

क्राइम(Shri Prakash shukla)| 90 का दशक उत्तर प्रदेश की सियासत और खुनी खेल, यूपी में कई गैंगस्टर आए और गये उनमे सबसे खतरनाक था श्रीप्रकाश शुक्ला. श्रीप्रकाश शुक्ला भारत का पहला गैंगस्टर था जिसने AK-47 का इस्तमाल किया था चलाया था और इतना ही नहीं वो एक मात्र गैंगस्टर था जिसने मुख्यमंत्री की सुपारी ली थी 6 करोड़ रूपए में, बी जे पी के दिग्गज नेता कल्याण सिंह उस समय यू.पी के मौजूदा मुख्यमंत्री थे.

इसके बारे में बताया जाता है की एक बार वो अपने 4 साथियों के साथ गोरखपुर से बहार जा रहा था लखनऊ के पस्स रूटीन नाके बंदी थी , इस की गाड़ी रुकी एक पुलिस वाला आया वो इसे जनता नहीं था तो उस पुलिस वाले ने इससे पूछा की कहा जा रहे हो, तो शिवप्रकाश शुक्ला ने गाड़ी के पिछले हिस्से से AK-47 निकली उस पोलिस वाले को दिखाया और कहा ‘ये AK-47 है मेरा नाम शिवप्रकाश शुक्ला है ‘ इस के बाद वो पुलिस वाला दो कदम पीछे हटा नाका खुला और वो निकल गय.

हलाकि इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई पर मौके पर मौजद लोगों का यही कहना था का कहना है इस बात से आप अंदाज़ लगा सकते है की उसका खौफ कैसा था. 

श्रीप्रकाश शुक्ला के ऊपर दर्जनों मामले दर्ज हुए, उनमें बिहार के मंत्री, और एक विधायक की हत्या के मामले भी शामिल थे. कई बड़े अपराधों में इसका नाम जुड़ा था बताया जाता है की इसने खुद अपने हाथों कम से कम 25 से 30 लोगों को मौत की नींद सुला दिया था. श्रीप्रकाश शुक्ला की गैंग में केवल 4 लोग थे और वो सभी इसी की तरह हमेशा AK-47 से लैस रहते थे.

श्रीप्रकाश शुक्ला (Shri Prakash shukla)की शुरुआत : 

श्रीप्रकाश शुक्ला (Shri Prakash shukla) का जन्म गोरखपुर के पास मामखोर के एक मध्यम वर्गी ब्राह्मण परिवार में हुआ था. पिता पेशे से एक स्कूल मास्टर थे, माँ गृहिणी थी और एक छोटी बहन थी जो कॉलेज में जाती थी शिवप्रकाश पहलवानी करता था उस के जीवन में सब ठीक चल रहा था और फिर एक घटना ने इसकी पूरी ज़िन्दगी बदल दी. आगे पढ़ें

पहला अपराध – एक बार ये अपनी बहन क साथ बाजार से घर लौट रहा था रस्ते में कुछ लड़के खड़े थे, उन में से एक राकेश तिवारी नाम के एक लड़के ने इसकी बहन को देख कर सिटी मरी बस ये सुनते ही ये पीछे मुदा उन लड़कों में से उस लड़के को उन सभी के बिच मारना शुरू कर दिया इसने उसे इतना मारा की उस लड़के की मौके पर ही मौत हो गई. इस क बाद वो कुछ लोकल नेताओं के सहारे पहेली बार गोरखपुर से बहार निकला और भाग के बैंकॉक पहुंच गया.

जब ये वापस भारत आया तब तक उसने जुर्म की दुनिआ में अपने पाँव ज़माने का पूरा मन बना लिया था.उस के बाद वो एक-एक कर एैसे लोगों को अपने साथ जोड़ता गया जो, उसके मनसूबो को साकार करने में उसका साथ दे सके कामियाब बना सके फिर उसके बाद शुरू हुई श्रीप्रकाश शुक्ल के गुनाहों की दास्ताँ.

इसे अपनी आतंक की पहचान बनानी थी फिर ये अपने 4 साथिओं के साथ रंगदारी , जमीन कब्ज़ा , अपहरण जैसे काण्ड करने शुरू किये इसने गोरखपुर और आस पास के कई बड़े व्यपारियो को डरना धमकाना और उनसे पैसे की मांग करने शुरू कर दी और इस दौरान जो भी उसे मना करता या उसके सामने खड़ा होता तो वो उसे मौत के घाट उतार देता.

इन सब घटनाओं के बाद श्रीप्रकाश शुक्ल के नाम का दहशत और दबदबा पुरे उत्तर प्रदेश में फ़ैल है , वह के कई दूसर गैंग वाले इससे जुड़ना चाहते थे लेकिन इसने किसी को अपने साथ नहीं जोड़ा वो मानता था की बड़ी गैंग से पुलिस का खतरा होता था. उस समय श्रीप्रकाश शुक्ल बाकि सरे गैंग वालो के लिए उनका बॉस बन चूका था उसकी बात को काटने की किसी में हिम्मत नहीं होती थी

फिर उसे बिहार के उस वक़्त के बड़े क्रिमिनल बाहुबली नेता सूरज भान ने श्रीप्रकाश उससे मिलने बिहार बुलवाया, वैसे श्रीप्रकाश अड़ियल स्वभाव का था पर उसे उस वक़्त बड़े हत्यार और संगरक्षण की जरुरत थी. श्रीप्रकाश सूरज भान से मिलने बिहार जेल गया इस मुलाकात का उस पर एक अलग ही असर पड़ा उसे पता चला की वो जितना कमा रहा था उससे कई गुना वो रेलवे के ठेके से कमा सकता है उसे ये भी अहसास हुआ की आगे चलके वो चुनाव भी लड़ सकता है.

सूरज भान के पास से ही उसे AK-47 मिला थी.इस के बाद उसने रेलवे के ठेके में काम कर शुरू कर दिया उसका कहना था ये जितने भी रेलवे के ठेके निकलेंगे वो सिर्फ श्रीप्रकाश शुल्का को मिलेंगे और धीरे धीरे वो नाम बनाने के लिए बिहार , उत्तर प्रदेश ,बंगाल,दिल्ली और कई राज्यों अपहरण , हत्या ,जबरन, वसूली, जैसे कामोंको अंजाम देना लगता है इसी तरह वो उत्तत प्रदेश में एक गैंगस्टर के रूप में उभर के सामने आता है.

इस ने सुर्खियां बटोर ने के लिया लखनऊ के बड़े पॉलिटिशियन वीरेन्द सहाई को दिन दहाड़े उसके सुरक्षा कर्मिओं के बेच AK-47 से भुन्द दिया. इस के बाद इसने एक विधायक को इसी तरह मौत के घाट उतार दिया. श्रीप्रकाश शुक्ल को नेताओं आईपीएस आईएएस अधकारियों का संरक्षण मिला हुआ था इसी लिए वो बेखौफ इन घटनाओ को अंजाम देता जा रहा था.

इन दो हत्या के बाद पुलिस और सरकार पर दबाव बढ़ गया और पुलिस श्रीप्रकाश पर शिकंजा कसने लगी. पुलिस उसे कई मरतफ़ा पकडने गई पर वो बॉर्डर का फ़ायदा उठा एक राज्य से दूसरे में भाग निकला पुलिस से मुठभेड़ में उसने ३ पुलिस वालों को भी मार गिराया. पुलिस के पास उसका सामना करने के हत्यार नहीं था और श्रीप्रकाश और उसके साथी हमेशा एक-४७ से लैश रहते थे. कई नाकाम प्रयासों के बाद पुलिस भी थक चुकी थी.

मुख्यमंत्री की सुपारी और श्रीप्रकाश शुक्ल का एनकाउंटर :-
4 मई 1998 को यूपी में पहली बार एसटीएफ का गठन किया गया
श्रीप्रकाश शुक्ल से निपटने के लिए.

इसके बाद उत्तेर प्रदेश में पहली बार एसटीएफ का गठन किया गया ताकि श्रीप्रकाश और उसके गिरोह पर नकेल कास सके उसे पकड़ सके. एसटीएफ लगातार श्रीप्रकाश को ट्रेस करने की कोशिश में लगी थी उसके तमाम पहचान वालों मदद करने वोलो पर नज़र बनाई हुई थी. एसटीएफ ने अपने मुखबिरों को एक्टिव किया ताकि श्रीप्रकाश से जुडी पल-पल की खबर मिल सके पर इनमे से कोई तरीका कारगर साबित नहीं हो पा रहा था.

इन सब के बिच एक खबर ने उत्तेर प्रदेश की सियासत और पुलिस मकहमे में हड़कंप मचा दिया. यूपी बड़े नेता साक्षी महाराज ने ये खबर दी की श्रीप्रकाश शुक्ल ने मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सुपारी 6 करोड़ रूपए में ली है हलाकि सुपारी देने वाले का नाम उन्होंने नहीं बताया और आज तक ये एक राज़ है की आखिर कल्याण सिंह की सुपारी दी किसने थी. इस खबर के आने के बाद एसटीएफ हरकत में आ गई, अपने सभी खबरि नेटवर्क को एक्टिव किया और ये तय किया की अब किसी भी कीमत पर श्रीप्रकाश को मारना होगा क्योकि मामला मुख्यमंत्री की सुरक्षा का है.

मोबाइल सर्विलांस से मिली जानकारी

श्रीप्रकाश (Shri Prakash shukla) अपने गर्लफ्रेंड से घंटो बात करता था , मोबाइल सर्विलेंस से पुलिस को कई बार उसके बातों से उसके डील अलग अलग जगहों पे जाने जाने की खबर मिल जाती और एसटीएफ वह पहले से घेरा बंदी कर देती , श्रीप्रकाश बेहद चालक था पुलिस के उसके पहुंचने से पहले पहुंचने की घटना से वो सावधान हो जाता है और उसे शक हो जाता है की मोबाइल से एसटीएफ को उसकी जानकारी मिल रही है. इसके बाद वो मोबाइल का इस्तमाल बंद कर देता है और पीसीओ से बात करना शुरू कर देता है. एसटीएफ के लिए उसका मिलना जितना ज़रूरी था उतना ही मुश्किल एसटीएफ ने उसके मोबाइल के साथ उसकी गाज़ियाबाद की गर्लफ्रेंड का नंबर भी सर्विलांस पे ले रखा था फिर एक दिन श्रीप्रकाश ने अपने गर्लफ्रेंड को पीसीओसे कॉल किया और पीसीओ मोबाइल एक्सपर्ट यूनिट ने उसका लोकेशन पता लगा लिया, लोकेशन गाज़ियाबाद दिल्ली हाईवे से लगे हुए एक पीसीओ की थी.

अब पुलिस के बयान अनुसार श्रीप्रकाश शुक्ल (Shri Prakash shukla) एनकाउंटर का सच

दिनांक 22 सितम्बर 1998 लोकेशन का पता लगते ही एसटीएफ की टीम को जानकारी दी गई और एसटीएफ चीफ के निर्देश पूरी एसटीएफ टीम दम-खत्म के साथ पुरे आटोमेटिक हत्यार के साथ रवाना हो गई. जब एसटीएफ मौके पर पहुंची तब श्रीप्रकश वापिस गारी में बैठ के निकल रहा था उसके साथ उसके 2 साथी गारी में थे पुलिस को देखते ही उन लोगों ने गोली चलदी और गाज़ियाबाद दिल्ली हाईवे की तरफ गाड़ी भागने लगे.

अब पुलिस उनका पीछा करने लगी, ये पुलिस की खुशकिस्मती थी या श्रीप्रकाश की बदकिस्मती उस दिन उसके पास AK-47 नहीं थी एसटीएफ के जवानो ने एक सुनसान जगहे देख कर इस की गाड़ी को घेर लिया उसके बाद दोनों तरफ से फायरिंग होने लगी श्रीप्रकाश और उसके साथियों की तरफ से 20 राउंड फायर हुये और एसटीएफ की तरफ से 52 राउंड फायर हुये और इसी में श्रीप्रकाश और उसके साथी मरे गए. ऐसा पुलिस ने कोर्ट में अपने बयान में कहा .

अब जाने एक और तरफ के बयान 

श्रीप्रकाश शुक्ला के मोबाइल सर्विलांस के दौरान पुलिस को पता चल चूका था की वो दिल्ली से रची किसी हत्यार के डील के लिए जाने वाला है और वो दिल्ली एयरपोर्ट से २० सितम्बर को फ्लाइट से रवाना होने वाला है. दिल्ली पुलिस और एसटीएफ ने जॉइंट ऑपरेशन में श्रीप्रकाश शुक्ला को ऐरपोटे के पास ही पकड़ लिया था उसे 2 दिन कही रखा और फिर एनकाउंटर वाली जगहे पर लाके मार दिया. हलाकि इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई पर उस समय मीडिया में भी यही बातें सामने आने लगी पुलिस का ऐसे भी उसे पकड़ ने का कोई इरादा तो था नही.

पर श्रीप्रकाश की गिरफ़्तारी से कई लोगों को खतरा हो सकता था. उसके मौत के बाद उसके पास मिले दायरे में कई अधिकारिओं नेताओं के नाम और नंबर भी मिले जिसके पुष्टि भी की गई. पर शायद ऐसे कामो का नतीजा यही होता है.

इसमें कोई दोराह नहीं की श्रीप्रकाश ने अपने कर्मो से खुद अपने लाए मौत लिखी थी.

THE PRESS NOTE

 

 

 

 

 

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