February 29, 2024

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Shiv Sena MLAs Disqualification Case अउद्धव ठाकरे गुट की याचिका खारिज, सली शिवसेना शिंदे गुट

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Shiv Sena MLAs Disqualification Case अउद्धव ठाकरे गुट की याचिका खारिज, सली शिवसेना शिंदे गुट

Shiv Sena MLAs Disqualification Case अउद्धव ठाकरे गुट की याचिका खारिज, सली शिवसेना शिंदे गुट

Shiv Sena MLAs Disqualification Case : शिवसेना में टूट, फिर चुनाव आयोग और अदालत में क्या हुआ? जानें अब स्पीकर के फैसले का क्या असर होगा

Shiv Sena MLAs Disqualification Case स्पीकर ने उद्धव ठाकरे गुट की याचिका खारिज, राहुल नार्वेकर ने कहा कि बहुमत का फैसला लागू होना चाहिए था. उद्धव गुट की मांग उन्होंने खारिज की. शिंदे गुट के पक्ष में स्पीकर का फैसला आया.

विधानसभा स्पीकर ने यह आगे कहा कि पार्टी के संविधान के अनुसार सीएम शिंदे को उद्धव गट हटा नहीं सकते। संविधान में पक्ष प्रमुख का कोई पद नहीं है। साथ ही, विधायक दल के नेता को हटाने का कोई प्रावधान संविधान में नहीं है। उन्होंने कहा कि शिंदे को हटाने का फैसला राष्ट्रीय कार्यकारिणी का होना चाहिए था। राष्ट्रीय कार्यकारिणी पर उद्धव गुट का रुख साफ नहीं है। इसी के साथ 25 जून 2022 के कार्यकारिणी के प्रस्तावों को स्पीकर ने अमान्य कर दिया है।

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Shiv Sena MLAs Disqualification Case अउद्धव ठाकरे गुट की याचिका खारिज, सली शिवसेना शिंदे गुट
Shiv Sena MLAs Disqualification Case अउद्धव ठाकरे गुट की याचिका खारिज, सली शिवसेना शिंदे गुट
 महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि मैं स्पीकर के रूप में 10वीं धारा के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग कर रहा हूं। अनुसूची का क्षेत्राधिकार सीमित है और यह वेबसाइट पर उपलब्ध ईसीआई के रिकॉर्ड से आगे नहीं जा सकता है और इसलिए मैंने प्रासंगिक नेतृत्व संरचना का निर्धारण करते समय इस पहलू पर विचार नहीं किया है।
2018 संशोधित संविधान को वैध नहीं माना जा सकता क्योंकि यह भारत के चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है। रिकॉर्ड के अनुसार,  मैंने वैध संविधान के रूप में शिव सेना के 1999 के संविधान को ध्यान में रखा है।

राहुल नार्वेकर, विधानसभा स्पीकर, ने 16 विधायकों की अयोग्यता के मामले पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि 1999 का शिवसेना का संविधान सर्वोपरि है, और उन्हें 2018 का संशोधित संविधान स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने इस बात को भी उठाया कि 2018 में संगठन में चुनाव नहीं हुआ था, और इस पर चर्चा की। वे यह भी कह रहे थे कि उनके पास सीमित अधिकार है, और वह असली शिवसेना को लेकर जानना चाहते हैं। इसमें दोनों गुट अपने असली होने का दावा कर रहे हैं

का पूरा मामला क्या है?

जून 2022 में टूट के बाद, एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे शिवसेना को अपनी पार्टी मानने के लिए चुनाव आयोग से लेकर अदालत तक कदम बढ़ा रहे हैं। इन दोनों गुटों ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष 34 याचिकाएं दायर की हैं। इनमें खुद को असली पार्टी मानने के साथ-साथ, दलबदल विरोधी कानूनों का हवाला देते हुए एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है।

Shiv Sena MLAs Disqualification Case का मामला शुरू कैसे हुआ?

पिछले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले जानकारी होना महत्वपूर्ण है। अक्तूबर 2019 में, महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय विधानसभा चुनाव हुए थे, जिसमें भाजपा ने 104 सीटों पर बड़ी जीत हासिल की थी। उस समय शिवसेना ने 56 सीटें जीती थी, जो कि भाजपा के साथ मिलकर चुनाव में उनकी साझेदारी थी। विपक्ष में, एनसीपी को 54 सीटें और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं, जबकि बाकी 29 सीटों पर छोटे दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी।

चुनाव के बाद, शिवसेना और भाजपा के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद हुआ था जिससे गठबंधन टूट गया था। भाजपा से अलग होने के बाद, नवंबर 2019 में शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी की सरकार बनाई, और उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद पर बैठाया था।

Shiv Sena MLAs Disqualification Case क्यों हुई बगावत ?

शिवसेना में बगावत के बाद, 20 जून 2022 को, एमएलसी चुनाव में शिवसेना के कई विधायकों ने भाजपा के उम्मीदवार को समर्थन दिया और यह बगावत का कारण बना। इसके बाद, एक दिन बाद, उद्धव ठाकरे से असंतुष्ट विधायक सूरत चले गए। इन विधायकों का नेतृत्व कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे कर रहे थे। इन घटनाओं के बाद, ये सभी गुवाहाटी पहुंचे, जहां 22 जून को शिवसेना के प्रमुख की अगुवाई में तीन नेताओं का प्रतिनिधिमंडल बागी विधायकों से मिलने पहुंचा। हालांकि, इस मुलाकात में कोई समझौता नहीं हुआ।

 

इसके बाद, उद्धव ठाकरे ने गुट को मनाने की कोशिश की, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने शिकायत की जहां डिप्टी स्पीकर ने 16 विधायकों को अयोग्य घोषित किया और उन्हें नोटिस जारी किया। इस कदम के खिलाफ, शिंदे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट ने डिप्टी स्पीकर की कार्रवाई पर रोक लगाई और इस मामले को 12 जुलाई तक स्थगित कर दिया।

उसी दौरान, भाजपा के नेता देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल से मिलकर फ्लोर टेस्ट की मांग की और राज्यपाल ने इसके लिए आदेश जारी किया। इससे पहले ही, उद्धव ठाकरे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस सियासी उथल-पुथल के बीच, 30 जून 2022 को उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा, जिसके बाद राज्य की कमान को एकनाथ शिंदे ने संभाला और देवेंद्र फडणवीस को उप-मुख्यमंत्री बनाया गया।

 

4 जुलाई 2022 को महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट हुआ, जिसमें एकनाथ शिंदे ने बहुमत साबित किया। शिंदे को सरकार बचाने के लिए 144 विधायकों का समर्थन चाहिए था। फ्लोर टेस्ट के दौरान 164 विधायकों ने शिंदे सरकार के पक्ष में वोट किया। विपक्ष में 99 वोट पड़े और 22 विधायक गैर हाजिर रहे।

इसके बाद, उद्धव गुट ने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की ओर रुख किया। चुनाव आयोग ने 17 फरवरी 2023 को अपना निर्णय सुनाया, जिसमें शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न दोनों ही एकनाथ शिंदे गुट को दिया गया। आयोग ने कहा कि शिंदे गुट ही असली शिवसेना है। इसके बाद, उद्धव ठाकरे ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी तेज कर दी।

17 फरवरी 2023 को पीठ ने शिवसेना के उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट की याचिकाओं पर सुनवाई की। 21 फरवरी 2023 से कोर्ट ने नौ दिनों तक इस मामले की सुनवाई की। 16 मार्च 2023 को सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले में कोर्ट ने उद्धव और शिंदे गुट के साथ-साथ केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, विधानसभा अध्यक्ष और राज्यपाल का भी पक्ष सुना। 11 मई 2023 को इस मामले में कोर्ट का अहम फैसला आया।

13 अक्तूबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष नार्वेकर को 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले शिवसेना विधायकों की अयोग्यता पर निर्णय करने का आदेश दिया था। उसी आदेश के अनुसार, नार्वेकर बुधवार को फैसला देंगे कि बगावत करने वाले 16 विधायक अपने पद पर बने रहने के लिए योग्य हैं या नहीं।

विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दोनों पक्षों ने 34 अयोग्यता याचिकाएं दायर की हैं। इसमें खुद को असली पार्टी बताने और दलबदल विरोधी कानूनों का हवाला देते हुए दूसरे के विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है। नार्वेकर इस वैध राजनीतिक दल को निर्धारित करेंगे और उसके आधार पर वह व्हिप जारी करने, स्पीकर के चुनाव और शिंदे सरकार के फ्लोर टेस्ट की वैधता का भी निर्धारण करेंगे।

 

 

 

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