February 29, 2024

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Karti Chidambaram ED money laundering case: कार्ति चिदंबरम ED के सामने मनी लॉन्ड्रींग मामले में पूछताछ जारी

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Karti Chidambaram ED money laundering case: कार्ति चिदंबरम ED के सामने मनी लॉन्ड्रींग मामले में पूछताछ जारी

Karti Chidambaram ED money laundering case: कार्ति चिदंबरम ED के सामने मनी लॉन्ड्रींग मामले में पूछताछ जारी

Karti Chidambaram ED money laundering case कार्ति चिदंबरम ED के समक्ष पेश: मनी लॉन्ड्रींग मामले में पूछताछ जारी

Karti Chidambaram ED money laundering case कार्ति चिदंबरम ने मनी लॉन्ड्रींग मामले में ED टीम ने दिल्ली में इसे पूछताछ के लिए बुलाया है। इस मामले का जिक्र साल 2011 में हुआ था, जहां कार्ति पर 50 लाख रुपये की रिश्वत लेने और चाइनीज नागरिकों को गलत तरीके से वीजा दिलवाने का आरोप है। सीबीआई ने 14 मई 2022 को दो कंपनियों सहित पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, और मार्च 2022 में कार्ति चिदंबरम और दूसरों के खिलाफ PE दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।

PMLA: दिल्ली की अदालत ने AAP नेता संजय सिंह के खिलाफ मामले को गंभीरता से देखते हुए जमानत अर्ज़ी को नकारा। उन्होंने साबित किया कि पेश किए गए सबूत मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में उनकी संलिप्तता को दर्शाते हैं।

कार्ति चिदंबरम पर आरोप था कि वे TSPL (Talwandi Sabo Power Ltd) नामक वेदांता ग्रुप की कंपनी के प्रोजेक्ट में चाइनीज विशेषज्ञों के लिए वीजा दिलाने में सहायता करके रिश्वत ली थीं। इस जांच में तथ्यों की सामने आने के बाद सीबीआई ने 14 मई 2022 को इस मामले में मुद्दा दर्ज किया था और अपनी जांच शुरू की थी। इसके साथ ही, जुलाई 2022 में सीबीआई ने कार्ति चिदंबरम और अन्य आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की और सबूत जुटाया था। इस मामले के आधार पर ED (Karti Chidambaram ED money laundering case )ने आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर अपनी जांच शुरू की थी।

सीबीआई और ED (Karti Chidambaram ED money laundering case )की जांच के मुताबिक, साल 2011 में TSPL (Talwandi Sabo Power Ltd) नामक कंपनी पंजाब के मानसा में चीनी कंपनी की सहायता से एक 1980 मेगावॉट का थर्मल पावर प्लांट स्थापित कर रही थी। लेकिन इस काम की देरी से कंपनी को भारी नुकसान हो सकता था, क्योंकि समय पर प्लांट चालू नहीं होने पर सरकार और बैंकों से पैनल्टी लग सकती थी। इस समस्या का समाधान करने के लिए, कंपनी के अधिकारी ने विकास मखारिया कार्ति चिदंबरम से संपर्क करने का फैसला किया। मखारिया ने कार्ति के सुझाव पर 30 जुलाई 2011 को गृह मंत्रालय के विदेश विभाग को प्लांट लगाने वाली चीनी कंपनी Shandong Electric Power Construction Corp (SEPCC) के 263 विशेषज्ञों को वीजा देने के लिए प्रार्थना पत्र लिखा था।

अक्टूबर 2010 में भारत सरकार ने प्रोजेक्ट वीजा की शुरुआत की थी, जिसमें पॉवर और स्टील कंपनियों के लिए स्किल्ड कर्मचारियों को इस श्रेणी के अंतर्गत वीजा दिया जाता था, लेकिन इसमें Re-Use का कोई प्रावधान नहीं था। इस वीजा को मंजूर करने की अनुमति गृह सचिव को थी, लेकिन उस समय के माहौल को देखते हुए यह जानकारी सामने आई है कि इस वीजा को मंजूर करने के लिए गृह मंत्री की मंजूरी आवश्यक थी।

Karti Chidambaram ED money laundering case: कार्ति चिदंबरम ED के सामने मनी लॉन्ड्रींग मामले में पूछताछ जारी
Karti Chidambaram ED money laundering case: कार्ति चिदंबरम ED के सामने मनी लॉन्ड्रींग मामले में पूछताछ जारी

Karti Chidambaram ED money laundering case :आरोप है कि TSPL कंपनी ने कार्ति चिदंबरम के करीबी भास्करण के कहने पर जुलाई 2011 में वीजा मामले में बदलाव के लिए आवेदन पत्र लिखा था। उस समय कार्ति के पिता, पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम थे। 17 अगस्त को विकास ने गृह मंत्रालय को भास्करण के लिए लिखे गए ईमेल को भेजा, जिसे भास्करण ने कार्ति को भेजा। एजेंसी के मुताबिक, कार्ति ने इस मामले में पी चिदंबरम से बात की और 50 लाख रुपये की मांग की थी। विकास द्वारा 50 लाख रुपये देने के बाद, 30 अगस्त 2011 को गृह मंत्रालय ने वीजा जारी कर दिया था।

मामले में पता चला कि भास्करण ने विकास के कहने पर सुशील मोरक्का की कंपनी M/s Bell Tools Ltd को Consultancy Service के नाम पर दो बिल भेजे थे। इसके बाद TSPL ने Bell Tools को चेक से पेमेंट किया और उसके बाद कंपनी ने कैश पेमेंट भास्करण को किया था। इसमें विशेष बात यह है कि Bell Tools कंपनी ‘Industrial Knife’ का उत्पादन करती है, जो कि बड़ी कंपनियों में इस्तेमाल होता है, और इसके अलावा इसका कोई अन्य काम नहीं है।

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