GST रिटर्न नहीं भरने वाले व्यापारियों को भरना होगा जुर्माना, विलंब शुल्क भी लगेगा

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GST रिटर्न नहीं भरने वाले व्यापारियों को भरना होगा जुर्माना, विलंब शुल्क भी लगेगा
GST रिटर्न नहीं भरने वाले व्यापारियों को भरना होगा जुर्माना, विलंब शुल्क भी लगेगा

GST रिटर्न नहीं भरने वाले व्यापारियों को भरना होगा जुर्माना, विलंब शुल्क भी लगेगा

नई दिल्ली। जीएसटी के रिटर्न अपेक्षा से कम दाखिल होने से चिंतित सरकार अब उन कारणों का पता लगाने में जुट गई है, जिनके चलते शुरुआती दो महीनों में रिटर्न फाइलिंग धीमी रही है। रिटर्न फाइल न करने वाले व्यापारी सरकार के रडार पर आ गए हैं। केंद्र और राज्यों के अधिकारी मिलकर इसका पता लगाने को एक सर्वेक्षण करने जा रहे हैं। सर्वे करने की जरूरत इसलिए पड़ी है, क्योंकि जुलाई व अगस्त के लिए जीएसटीआर (GST) -3बी अपेक्षा के अनुरूप दाखिल नहीं हुए हैं। यही वजह है कि राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने तीन अक्टूबर को पत्र लिखकर सीबीईसी और राज्यों के कर आयुक्तों को एक प्रश्नावली भेजी है ताकि कम जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के कारणों का पता लगाया जा सके।

सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड यानी सीबीईसी में सदस्य (जीएसटी) (GST) महेंद्र सिंह इस सर्वे के नतीजों का विश्लेषण करेंगे। महेंद्र ने भी इस संबंध में चार अक्टूबर को अलग से एक पत्र लिखकर इस तरह का सर्वे करने का आग्रह किया है। इसके लिए अधिकारियों को एक निश्चित समय दिया गया है। सूत्रों ने कहा कि सर्वे के लिए 200 ऐसे व्यापारियों का चयन किया जाएगा जो जीएसटी में पंजीकृत तो हैं लेकिन जुलाई और अगस्त का रिटर्न फाइल नहीं किया है। ऐसे व्यापारियों से अधिकारी सवाल करेंगे।

अगस्त में 68.20 लाख व्यापारियों को जीएसटीआर-3बी दाखिल करना था। एक अक्टूबर तक मात्र 42.96 लाख व्यापारियों ने ही जीएसटीआर-3बी जमा किया है। इस तरह अगस्त के लिए मात्र 63 प्रतिशत व्यापारियों ने ही यह जीएसर्टी रिटर्न दाखिल किया था। अगस्त के लिए जीएसटीआर-3बी (GST) दाखिल करने की अंतिम तिथि 20 सितंबर थी। जुलाई में 59.57 लाख व्यापारियों को जीएसटीआर-3बी भरने थे, लेकिन पहली अक्टूबर तक इसमें से 88.35 प्रतिशत ने ही इस रिटर्न को दाखिल किया। इसी तरह जुलाई के लिए जीएसटीआर-1 दाखिल करने की अंतिम तिथि बार-बार बढ़ाने के बावजूद एक अक्टूबर तक मात्र 55.३37 प्रतिशत व्यापारियों ने ही इस रिटर्न को फाइल किया है। जीएसटीआर-1 रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर है।

सूत्रों का कहना है कि रिटर्न फाइलिंग का स्तर निम्न रहने के चलते ही सरकार ने यह सर्वेक्षण कराने का फैसला किया है। बताया जाता है कि रिटर्न फाइलिंग का आंकड़ा कम रहने पर जीएसटी (GST) काउंसिल में भी चर्चा की गई। जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) में खामियों के चलते बहुत से कारोबारियों को रिटर्न फाइल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। यही वजह है कि जीसटीएन की कमियों को दूर करने के लिए काउंसिल ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी की अध्यक्षता में राज्यों के वित्त मंत्रियों की एक समिति का गठन किया है। यह समिति हर पंद्रह दिन पर जीएसटीएन की समीक्षा कर रही है। इसके अलावा जीएसटी काउंसिल ने छह अक्टूबर को हुई 22वीं बैठक में छोटे और मझोले व्यापारियों के लिए जीएसटी का अनुपालन आसान बनाया है। इससे करीब 90 फीसद व्यापारियों को मासिक रिटर्न दाखिल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

रिटर्न फाइल न करने वालों से पूछे जाएंगे ये सवाल

1. आपने जीएसटीआर३बी रिटर्न कौन सा फाइल नहीं किया गया है?

2. क्या आपको पता है कि जीएसटीआर३बी प्रत्येक पंजीकृत व्यापारी को भरना है?

3. आपने जीएसटीआर३बी क्यों फाइल नहीं किया?

4. रिटर्न दाखिल करने में आपको क्या परेशानी आई?

 

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