Chitra Ramakrishna एनएसई की पूर्व एमडी चित्रा रामकृष्ण को ED ने किया गिरफ्तार
Chitra Ramakrishna एनएसई की पूर्व एमडी चित्रा रामकृष्ण को ED ने किया गिरफ्तार

 

Chitra Ramakrishna, NSE, Mumbai,PMLA: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व एमडी और सीईओ चित्रा रामकृष्ण को गिरफ्तार किया है. इसके बाद कोर्ट ने चित्रा को ईडी की 4 दिन की रिमांड में भेज दिया है. एजेंसी ने आरोपितों के खिलाफ पीएमएलए एक्ट (Prevention of Money Laundering Act) के आपराधिक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कराया है। आपको बता दें कि सीबीआई ने भी आरोपितों के खिलाफ पिछले हफ्ते इससे जुड़े एक मामले में केस दर्ज किया था।

ANI

ईडी ने रामकृष्ण(Chitra Ramakrishna), मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडे और रवि नारायण के खिलाफ मनी लांड्रिंग (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। सूत्रों के मुताबिक एनएसई को-लोकेशन मामले में एक वरिष्ठ बिजनेस पत्रकार भी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और ईडी की जांच के घेरे में आ गया है।

(Chitra Ramakrishna) हाल ही में सीबीआई ने भी एक मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि रवि नारायण के अलावा चित्रा रामकृष्ण ने मुंबई के अब सेवानिवृत्त पुलिस आयुक्त पांडे द्वारा बनाई गई एक कंपनी को शेयर बाजार के कर्मचारियों के फोन कॉल को अवैध रूप से टैप किया। इसी के बाद ईडी ने भी केस दर्ज किया।

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब चित्रा रामकृष्ण पर किसी जांच एजेंसी ने नकेल कसा है। मार्च महीने में को-लोकेशन घोटाला मामले को लेकर सीबीआई ने चित्रा रामकृष्ण को गिरफ्तार किया था

(Chitra Ramakrishna)इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि एक बिजनेस पत्रकार की भूमिका तब सामने आई, जब सीबीआई संजय पांडे से जुड़ी एक फर्म को दिए गए ठेके और कुछ लोगों की कथित जासूसी की जांच कर रही थी। सूत्रों ने कहा कि सीबीआई को ऐसे सबूत मिले हैं जिनमें संजय पांडे द्वारा अवैध जासूसी का सुझाव दिया गया है।

(Chitra Ramakrishna)सीबीआई ने अपनी जांच के दौरान संजय पांडे से जुड़ी एक फर्म आईसेक सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के परिसर से कुछ बिल की रसीदें, रिकॉर्डिंग के आवाज के नमूने, रिकॉर्डिंग के मूल टेप और सर्वर के साथ-साथ दो लैपटॉप बरामद किए थे। सूत्रों के मुताबिक, एनएसई की पूर्व प्रमुख चित्रा रामकृष्णा और रवि नारायण, एनएसई के कर्मचारियों की अवैध रूप से जासूसी करने के लिए एक निजी फर्म से जुड़े रहे।

सीबीआई को संदेह है कि दोनों यह पता लगाना चाहते थे कि एनएसई के कर्मचारी क्या चर्चा करते थे या फिर क्या एक्सचेंज से संबंधित जानकारी लीक कर रहे थे। सूत्रों ने बताया कि संजय पांडे से जुड़ी कंपनी आईसेक सर्विसेज को कॉन्ट्रैक्ट के रूप में करीब 4.45 करोड़ रुपयों का भुगतान किया गया था। संयोगवश यह कथित जासूसी साल 2009 से 2017 तक हुई, जब को-लोकेशन घोटाला हुआ था।

गौरतलब है कि, सीबीआई ने पिछले हफ्ते शुक्रवार को संजय पांडेय के आवास समेत मुंबई, पुणे, कोटा, लखनऊ और दिल्ली-एनसीआर समेत आरोपियों के 18 परिसरों पर छापेमारी की थी। सूत्रों ने बताया कि इस मामले में सीबीआई ने संजय पांडे से भी पूछताछ की थी।

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