February 29, 2024

The Press Note

A News Blog

Bilkis Bano Case दोषियों की सजा माफी क्यों हुई रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार का फैसला पलटा

1 min read
Bilkis Bano Case दोषियों की सजा माफी क्यों हुई रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार का फैसला पलटा

Bilkis Bano Case दोषियों की सजा माफी क्यों हुई रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार का फैसला पलटा

Bilkis Bano Case सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो गैंगरेप केस में दोषियों की समय से पहले रिहाई को खारिज कर दिया है।

Bilkis Bano Case सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गोधरा दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप करने और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या करने वाले 11 दोषियों को दी गई सजा में छूट देने वाले गुजरात सरकार के आदेश को रद्द कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह इस अदालत का कर्तव्य है कि वह मनमाने आदेशों को तुरंत सही करे और जनता के विश्वास की नींव को कायम रखे। न केवल इतना, उच्चतम न्यायालय ने सभी 11 दोषियों को दो हफ़्तों के अंदर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

Bilkis Bano Case सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार का फैसला पलटा

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने गुजरात सरकार द्वारा 11 दोषियों को दी गई छूट को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि गुजरात सरकार के पास सजा में छूट देने का कोई अधिकार नहीं था। अदालत ने यह भी कहा कि जिस कोर्ट में मुकदमा चला था, उसे रिहाई पर फैसला लेने से पहले गुजरात सरकार से राय लेनी चाहिए थी। इसके अलावा, जिस राज्य में आरोपियों को सजा मिली थी, उसी राज्य को रिहाई पर फैसला लेना चाहिए था। दोषियों को महाराष्ट्र में सजा मिली थी। इसलिए, रिहाई का आदेश निरस्त हो गया।

Bilkis Bano Case दोषियों की सजा माफी क्यों हुई रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार का फैसला पलटा
Bilkis Bano Case दोषियों की सजा माफी क्यों हुई रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार का फैसला पलटा

Sharad Mohol Murder Case गैंगस्टर शरद मोहोल की गोली मारकर हत्या, 8 गिरफ्तार

न केवल इतना, सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई के खिलाफ याचिकाओं को भी सुनवाई योग्य ठहराया। अदालत ने कहा कि 13 मई 2022 के उस आदेश में जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को रिहाई पर विचार करने को कहा था, दोषियों ने भौतिक तथ्यों को छिपाकर और गलत तथ्य पेश करके प्राप्त किया था।

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने फैसला सुनाते हुए कहा, “अपराधियों को सजा इसलिए दी जाती है ताकि भविष्य में अपराधों की घटनाओं में कमी आ सके। अपराधी को सुधारने का अवसर भी प्रदान किया जाता है। लेकिन पीड़ित के दुख का भी विचार किया जाना आवश्यक है। हमारा मानना है कि इन दोषियों से स्वतंत्रता लेना उचित होगा। एक बार दोषी ठहराए जाने और जेल भेजे जाने के बाद उन्होंने अपने स्वतंत्रता के अधिकार को खो दिया है। साथ ही, यदि वे पुनः जमानत पर रिहाई पाना चाहते हैं तो उन्हें जेल में ही रहना होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी 11 दोषियों को 2 हफ्तों के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।

गुजरात के 2002 के दंगों के दौरान, भीड़ ने बिलकिस बानो और उनके परिवार पर हमला किया था। भीड़ ने 5 महीने की गर्भवती बिलकिस के साथ बलात्कार किया और उनके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या कर दी। बचे हुए 6 लोग भागने में सफल रहे। सीबीआई ने इस मामले में 11 लोगों को दोषी पाया और उन्हें उम्रकैद की सज़ा सुनाई। दोषियों में से एक ने गुजरात हाई कोर्ट में अपील की लेकिन अदालत ने इसे ख़ारिज कर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मई 2022 में गुजरात सरकार से फ़ैसला लेने को कहा। सरकार ने 11 दोषियों को रिहा कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *