दसवीं की परीक्षाएं रद्द व बारहवीं की स्थगित, शिक्षा मंत्री

10वीं और 12वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षाओं को स्थगित किए जाने की मांग तेज होने के बीच आज सीबीएसई परीक्षाओं को लेकर पीएम मोदी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र ने बुधवार को CBSE स्टूडेंट्स के लिए बड़ा और जरूरी फैसला किया। सरकार ने 4 मई से शुरू होने वाली 10वीं की परीक्षा रद्द कर दी और 12वीं की परीक्षा फिलहाल अभी टाल दी है। सरकार 1 जून को 12वीं की परीक्षा पर फैसला करेगी। एग्जाम कराने का फैसला हुआ तो छात्रों को 15 दिन का वक्त दिया जाएगा, यानी परीक्षा 15 जून के बाद ही होगी।

सीबीएसई के पूर्व चेयरमैन अशोक गांगुली के मुताबिक 21वीं सदी में भी जिस तरह से साल भर की पढ़ाई कराकर एक बार में मूल्यांकन करने को जो पद्धति चली आ रही है ये काफी पुरानी है। अब चूंकि अनिश्चितताओं का दौर है और पूरे विश्व को कोरोना महामारी ने अपनी चपेट में ले लिया है तो जरूरी है कि अब मूल्यांकन के लिए सिर्फ अकादमिक परीक्षाओं पर ही न निर्भर रहा जाए। बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बोर्ड की तरह सीबीएसई और अन्य राज्य बोर्ड को मूल्यांकन के लिए रचनात्मक आकलन की एक व्यवस्था को आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू कर देना चाहिए।

शिक्षा मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि शॉर्ट नोटिस पर 12वीं के ऑनलाइन एग्जाम संभव नहीं है। इतनी जल्दी छात्र अपने आपको ऑनलाइन पैटर्न के लिए कैसे तैयार करेंगे? ऐसे में एग्जाम ऑनलाइन करवाना और इन्हें कैंसल करने जैसे विकल्प संभव नहीं। ये फैसले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की बुधवार दोपहर करीब घंटे भर चली बैठक में लिया गया। कहा जा रहा है कि बैठक में अधिकारियों का सुझाव था कि 12वीं और 10वीं दोनों की परीक्षाएं टाली जाएं, लेकिन प्रधानमंत्री ने सबके सुझाव सुनने के बाद कहा कि बच्चे पहले ही कोरोना में बहुत नुकसान और परेशानी झेल चुके हैं। ऐसे में 10वीं की परीक्षा को रद्द किया जाना चाहिए और 12वीं की परीक्षा को टाला जाना चाहिए।

 

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